शारदा सृजन मंडल द्वारा आयोजित मासिक काव्य गोष्ठी

साहित्य ऊर्जा का अनुपम स्रोत है – रमेश धाड़ीवाल

काव्य मन को आह्लादित करता है – पं. मनोहर मंडलोई

साहित्य निरोगी बनाता है – डॉ. पाटीदार

बद्दल फाट्या सियो नी जाय – गिरधर सोनी

कुक्षी – साहित्य मानव जीवन में ऊर्जा भरता है। पद्य साहित्य व्यक्ति को अनुपम आनंद प्रदान करता है वहीं गद्य साहित्य ज्ञान परम्परा को पुष्ट बनाता है। उक्त विचार शारदा वाचनालय कुक्षी में शारदा सृजन मंडल द्वारा आयोजित मासिक काव्य गोष्ठी में प्रखर वक्ता व साहित्यकार रमेशचन्द्र धाड़ीवाल ने व्यक्त किए। इस अवसर पर राष्ट्रीय पत्रकार परिषद के महासचिव व वरिष्ठ पत्रकार पं मनोहर मंडलोई ने कहा कि कविता कानन में शब्द पुष्पों को ग्रहण कर मन आह्लादित हो जाता है। नगर सुरक्षा समिति के जिला संयोजक डॉ. निर्मल कुमार पाटीदार ने कहा कि साहित्य जीवन को निरोगी बनाने में महती भूमिका निभाता है। रंग उत्सव होली के पावन पर्व पर आयोजित इस काव्य गोष्ठी में कवि मित्रों ने अपनी कविताओं में राष्ट्रीयता , लोकसंस्कृति और लोक पर्व होली के विविध रंग भरे। प्रेमलता सोलंकी ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। गोपाल सोनी ने आई है होली स्नेह के रंग लुटा दो से काव्य पाठ की शुरूआत की। गिरधर सोनी ने निमाड़ी रचना बद्दल फाट्या सिओ नि जाय रचना से सभी के मन को गदगद किया। मनीष भावसार ने काश वही बचपन होता , भूपेन्द्र वर्मा ने फागुन आंगन डाल दी रंगों की सौगात , मनोज साधु ने लिखा दूध को दूध अगर तो पानी को भी पानी लिख , राजेन्द्र गुप्ता ने आई बसंत आया फाग , जगदीश गुप्ता ने मकां तो है पर घर नहीं मिलता , डॉ.अजीज लक्की ने बुरा न मानो होली है, यतीन्द्र डुंगरवाल ने होली खेलत है नन्दलाल गीत गाया , रविन्द्र जैन रूपम ने वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर रचना पढ़ी तो आरना परसाई ने लोकसंस्कृति पर काव्य पाठ किया व दीपक शर्मा ने होली के लोकपर्व को हर्ष और उल्लास के साथ मनाने की शुभकामना दी।

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